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मैं रूम से बाहर खड़ा अपनी मम्मी को अपने सगे भाई से ये सब करते देख रहा था, लकीन मामा से बदला लेने के लिए मजबूर था देखने को क्योकि यदि अभी कुछ करता तो सिर्फ पापा की तरह उनको घर से निकाल सकता था बदला नही ले सकता था जैसा मैंने सोचा था। अमित: (मुझे बीच में टोकते हुए) आंटी जी आप फिकर ना करे. आपको अपने घर में मेरी माजूदगी कर अहसास तक नही होगा. में अपनी आँखें हमेशा फर्श की तरफ रखूँगा. आप मेरा यकीन मानिए……

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